अहमदाबाद/गुरुग्राम: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए, जूनिपर ग्रीन एनर्जी (Juniper Green Energy) ने देश की पहली 'फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी' (FDRE) परियोजना की कमीशनिंग शुरू कर दी है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को कंपनी ने घोषणा की कि यह एकीकृत हाइब्रिड प्रोजेक्ट अब ग्रिड की मांग के अनुसार स्थिर और भरोसेमंद बिजली की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी नवाचार को दर्शाती है, बल्कि भारत के पारंपरिक कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
तकनीकी संरचना और क्षेत्रीय विस्तार
यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजस्थान और गुजरात के भौगोलिक क्षेत्रों में फैली हुई है, जो तीन मुख्य घटकों का एक शक्तिशाली मिश्रण है:
- सोलर और विंड: इसमें 259 MWp सोलर और 280 MW विंड क्षमता शामिल है। सोलर घटक का परिचालन मार्च 2026 में ही शुरू हो चुका था।
- बैटरी स्टोरेज (BESS): ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 200 MWh की बैटरी स्टोरेज प्रणाली जोड़ी गई है, जिसने अप्रैल 2026 में अपना परिचालन शुरू किया है।
- SJVN के साथ साझेदारी: यह प्रोजेक्ट SJVN लिमिटेड द्वारा जारी किए गए टेंडर के तहत हासिल किया गया था, जिसमें जूनिपर ग्रीन ने 200 MW का 'पावर परचेज एग्रीमेंट' (PPA) साइन किया है।
हरियाणा की गर्मी और बिजली संकट का समाधान
जूनिपर ग्रीन एनर्जी का यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर हरियाणा राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
- मांग के अनुसार आपूर्ति: SJVN ने हरियाणा पावर परचेज सेंटर (HPPC) के साथ 'बैक-टू-बैक' समझौता किया है, जिससे राज्य की DISCOMs को उनकी मांग के पैटर्न (Demand Profile) के अनुसार बिजली मिलेगी।
- समय से पहले कमीशनिंग: उत्तर भारत में भीषण गर्मी और हरियाणा में बिजली की बढ़ती रिकॉर्ड मांग को देखते हुए, कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को निर्धारित समय से पहले शुरू कर एक मिसाल पेश की है।
सीईओ अंकुश मलिक ने इस अवसर पर कहा कि FDRE केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य का ऊर्जा मॉडल है, जहाँ नवीकरणीय ऊर्जा केवल 'उपलब्ध' नहीं होगी, बल्कि 'डिस्पैचेबल' (जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल योग्य) होगी। यह भारत के 2030 तक के 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य में एक क्रांतिकारी मोड़ साबित हो सकता है।