अंतिम-संस्कार के बाद गमगीन-परिजनों को धोकनी पड़ी थाने की देहरी
परिजनों को शव सुपुर्द करने वाले अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को दी बगैर पोस्टमार्टम के परिजनों के द्वारा शव ले जाने की सूचना
आवारा कुत्तों के हमले में घायल मासूम ने चार दिन वेंटिलेटर पर लड़ता रहा जिंदगी की जंग, दौराने उपचार तोड़ा दम
मांगलियावास...अजमेर...आवारा कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल डेढ़ माह के मासूम 'सांवरा' की अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम ने करीब चार दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद आज अंतिम सांस ली।
यह घटना गत 24 अप्रैल की रात को पीसांगन उपखंड क्षेत्र के सरसड़ी गांव से लगती नागेलाव सरहद पर बनी एक झोपड़ी में हुई थी। जहां डेढ़ माह का मासूम सांवरा अपनी झोपड़ी के भीतर सो रहा था और मां झोपड़ी के बाहर चूल्हे पर खाना बना रही थी।
बेटे को बचाने के लिए कुत्तों से भिड़ पड़ी मां
झोपड़ी के पास लड़ रहे आवारा कुत्तों का झुंड अंधेरे का फायदा उठाकर झोपड़ी में घुस गया और सोते हुए मासूम पर हमला कर दिया। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर झोपड़ी के बाहर खाना बना रही उसकी मां केलम तुरंत दौड़कर झोपड़ी के अंदर पहुंची। मां केलम ने देखा कि कुत्तों ने बच्चे को अपने जबड़ों में दबोच रखा है। मां ने लगभग 5 मिनट तक कुत्तों से संघर्ष किया और अपने मासूम पुत्र सांवरा को बचाने के लिए उसके ऊपर लेट गईं, जिसके उपरांत आवारा कुत्तों का झुंड वहां से भाग गया।
कुत्तों के इस हमले में बच्चे की आंतें शरीर से बाहर आ गई थीं और वह लहूलुहान हो गया था। गंभीर हालत में बच्चे को तुरंत ही जवाहरलाल नेहरू अस्पताल अजमेर ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसकी सर्जरी की। बच्चे की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी रखा गया था।
मासूम की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने आज सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर परिजनों को शव सुपुर्दगी नामा देकर शव सौंप दिया। परिजनों ने अस्पताल से सीधे पुष्कर जाकर सावित्री माता की पहाड़ी की तलहटी के समीप स्थित भोपा समाज के श्मशान स्थल पर हिंदू रीतिरिवाज के अनुसार मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया।
अंतिम संस्कार के उपरांत पीसांगन पुलिस के बुलावे पर पीड़ित पिता मकराम भोपा,मां केलम भोपा,नाना बीरबल भोपा अपने अन्य परिजनों समेत थाने पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के द्वारा जारी किया गया शव सुपुर्दगी नामा पेश किया, जिसके आधार पर उन्हें शव सुपुर्द किया गया था। यह घटना अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान तो खड़े करती ही है, साथ ही यक्ष प्रश्न यह भी खड़ा करती है कि जब शव विधिवत प्रक्रिया के साथ परिजनों को सौंपा गया। लेकिन शव सुपुर्दगी के डेढ़ घंटे बाद जब मासूम का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। तब अस्पताल प्रशासन ने बाद में पोस्टमार्टम की बात कहकर उन्हें पुलिस कार्रवाई के नाम पर थाने के आखिर चक्कर क्यों कटवाएं। वही मासूम की मौत रेबीज़ वायरस से हुई यहां किसी और कारण से यह सवाल भी मासूम के अंतिम संस्कार के साथ ही एक सवाल बनकर रह गया।
*अस्पताल प्रशासन ने भी शव सुपुर्दगी के बाद किया था पीड़ित पिता से तीन बार संपर्क*
अस्पताल प्रशासन ने पीड़ित पिता मकराम भोपा के मोबाइल नंबर 7728903596 पर तीन बार मोबाइल नंबर +919001862613 से 8 बजकर 49 मिनट पर, मोबाइल नंबर +919079146996 से 8 बजकर 52 मिनट पर व मोबाइल नंबर +919414969501 से 9 बजकर 9 मिनट पर कॉल किया और अपने हाथों सौंपे गए शव को पुन अजमेर अस्पताल लाने की बात कही, लेकिन तब तक मकराम अपने मासूम पुत्र एवं आंखों के तारे सांवरा का अंतिम संस्कार कर चुका था। तब अस्पताल प्रशासन ने मोबाइल नंबर 7976362533 से पीसांगन थाने पर संपर्क किया। पीसांगन पुलिस को परिजनों के द्वारा सांवरा का शव पोस्टमार्टम के बगैर परिजनों के द्वारा ले जाने की बात कहते हुए परिजनों से संपर्क कर शव अजमेर लाने की बात कही।
इनका कहना:-पीड़ित पिता मकराम भोपा व परिजनों ने बताया कि यदि अस्पताल प्रशासन सांवरा का शव सौंपने से पहले पोस्टमार्टम की बात कहते तो सब कुछ ठीक था। लेकिन उनके कलेजे के टुकड़े के अंतिम संस्कार करने के बाद पुलिस के माध्यम से शव पुनः अजमेर लाने की बात कहना एक तरह से उनके साथ एक भद्दा मजाक हैं।
*नहीं है पीड़ित परिवार के सिर पर साया,नहीं मिल रहा किसी भी सरकारी योजना का फायदा*
रास थाना क्षेत्र के भीमगढ़ निवासी एवं हाल निवासी कालेसरा,पीसांगन पीड़ित मकराम व उसका परिवार आज भी फूंस की झोपड़ी में निवास करता है। पीड़ित मकराम के सिवाय आधार कार्ड के कोई भी सरकारी दस्तावेज अब तक बने हुए नहीं है और यह बात स्वयं मकराम ने कही है। वैसे समाज की अंतिम कतार में बैठे मकराम भोपा जैसे लोगों को ही निःशुल्क गेहूं वितरण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं की दरकार है। लेकिन अफसोस कि आज भी जरूरत मंद मकराम जैसे लोग सरकारों के लाख दावों के बावजूद योजनाओं से महरूम हैं।
मांगलियावास.... पीड़ित की बनी हुई झोपडी, मासूम के परिजन, मासूम की फाइल फोटो