बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के निधन ने न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया को शोक में डुबो दिया है। ढाका में आयोजित उनके अंतिम संस्कार ने एक ऐसा दुर्लभ दृश्य पेश किया, जिसने पिछले एक दशक से सुस्त पड़े दक्षेस (SAARC) संगठन में नई जान फूंकने की उम्मीद जगा दी है।
अंतिम संस्कार में जुटे शीर्ष नेता
खालिदा जिया, जो दुनिया की दूसरी महिला मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष थीं, को अंतिम विदाई देने के लिए दक्षिण एशिया के तमाम देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंचे।
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भारत की उपस्थिति: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस दुखद अवसर पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
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क्षेत्रीय एकजुटता: अंतिम संस्कार में मालदीव, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान सहित अन्य सदस्य देशों के नेताओं की मौजूदगी ने क्षेत्रीय कूटनीति का एक नया अध्याय लिखा।
मुहम्मद यूनुस का SAARC को लेकर बड़ा बयान
बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने दक्षिण एशियाई नेताओं द्वारा दिखाए गए इस सम्मान पर गहरी भावुकता व्यक्त की।
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दक्षेस का पुनरुद्धार: यूनुस ने मालदीव के मंत्री अली हैदर अहमद के साथ बैठक में कहा, "अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान हमने दक्षेस की सच्ची भावना देखी। यह संगठन भले ही बैठकों में सक्रिय न हो, लेकिन इसकी भावना अभी भी जीवित है।"
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एकजुटता की अपील: यूनुस ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि साझा आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से लड़ने के लिए दक्षेस का सक्रिय होना समय की मांग है।
SAARC के इतिहास और भारत का रुख
दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) पिछले कई वर्षों से गतिरोध का सामना कर रहा है:
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पिछला शिखर सम्मेलन: आखिरी बार सदस्य देश 2014 में काठमांडू में मिले थे।
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2016 का गतिरोध: इस्लामाबाद में होने वाले 2016 के शिखर सम्मेलन का भारत ने बहिष्कार किया था (आतंकवाद और सुरक्षा कारणों से)। इसके बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी हटने का फैसला किया, जिससे सम्मेलन रद्द हो गया।
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मौजूदा स्थिति: भारत वर्तमान में दक्षेस को तुरंत सक्रिय करने के प्रति बहुत उत्साहित नहीं है, क्योंकि उसका ध्यान BIMSTEC जैसे अन्य क्षेत्रीय समूहों पर अधिक केंद्रित है।
निष्कर्ष: शोक से कूटनीति तक
खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनके अंतिम संस्कार ने दक्षिण एशियाई देशों को एक मंच पर लाने का काम किया है। मुहम्मद यूनुस इस 'इमोशनल मोमेंट' का उपयोग ठंडे बस्ते में पड़े SAARC को फिर से सक्रिय करने के लिए एक कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं।