मुंबई, 29 अगस्त, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में सामने आई धांधली और गड़बड़ी के बाद राज्य सरकार अब सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी विभागों में दिव्यांग कोटे से नियुक्त कर्मचारियों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। इस प्रक्रिया में सरकारी हॉस्पिटल में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की देखरेख में कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा। साथ ही उनके सभी दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जाएगी। सरकार का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी की नौकरी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पाई गई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कार्मिक विभाग के शासन सचिव कृष्ण कांत पाठक ने बताया कि अधिकृत मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में यह जांच होगी। विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी कर्मचारी के दिव्यांगता सर्टिफिकेट या डॉक्यूमेंट्स में गड़बड़ी मिलती है, तो उसके खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को शिकायत भी दी जाएगी।
पहले चरण में पिछले पांच सालों में नियुक्त हुए दिव्यांग कर्मचारियों की जांच की जाएगी। इसके बाद प्रदेशभर के बाकी कर्मचारियों को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। दरअसल, राजस्थान में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच के दौरान SOG को फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट से नौकरी हासिल करने के सबूत मिले थे। इसके बाद यह जानकारी सरकार को सौंपी गई थी। हाल ही में जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के विशेष मेडिकल बोर्ड ने 29 कर्मचारियों की जांच की थी, जिसमें पाया गया कि 24 कर्मचारी फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी कर रहे थे। इनमें टीचर, एएनएम, स्टेनोग्राफर और अन्य कर्मचारी शामिल थे। इसी खुलासे के बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में दिव्यांग कोटे पर काम कर रहे सभी कर्मचारियों की दोबारा जांच करने का निर्णय लिया है।