नयी दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'जल जीवन मिशन' को हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में नई गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बुधवार, 06 मई 2026 को मिजोरम सरकार और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने केंद्र सरकार के साथ एक 'सुधार-आबद्ध समझौता ज्ञापन' (Reform-Linked MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल पाइप से पानी पहुंचाना है, बल्कि जल आपूर्ति प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और समुदाय-आधारित बनाना है।
स्थानीय भागीदारी और संचालन पर जोर
जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की आभासी उपस्थिति में हुए इस करार के तहत, ग्राम पंचायतों को जल प्रबंधन का केंद्र बनाया जाएगा।
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जन भागीदारी: समझौते के अनुसार, अब गांवों में जल समितियों को मजबूत किया जाएगा ताकि वे स्वयं आपूर्ति नेटवर्क का संचालन और रखरखाव (O&M) कर सकें।
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गुणवत्ता और स्थिरता: यह मॉडल सुनिश्चित करेगा कि हर घर को केवल पानी ही न मिले, बल्कि वह नियमित और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।
2028 का लक्ष्य और प्रशासनिक सक्रियता
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह समझौता 2028 तक प्रत्येक ग्रामीण घर को 'नल से जल' प्रदान करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
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मिजोरम की सराहना: मंत्री ने दुर्गम पहाड़ियों के बावजूद मिजोरम द्वारा की गई प्रगति की सराहना की। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने विश्वास दिलाया कि राज्य तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को तेजी से लागू करेगा।
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लद्दाख के लिए निर्देश: लद्दाख के शून्य से नीचे तापमान वाले कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में शीतकालीन जल आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष तकनीकी सुधारों पर जोर दिया गया है।
यह एमओयू राज्यों को अतिरिक्त केंद्रीय अनुदान प्राप्त करने के लिए सुधारों की एक श्रृंखला से जोड़ता है, जिसमें जल शुल्क संग्रह और सौर-आधारित पंपिंग प्रणालियों को बढ़ावा देना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'सर्विस-सेंट्रिक' मॉडल से जल जीवन मिशन का बुनियादी ढांचा लंबे समय तक संवहनीय (Sustainable) बना रहेगा और ग्रामीण भारत की जीवन सुगमता (Ease of Living) में सुधार होगा।